Spread the loveVikram aur Betal – Chor ki kahaani. जब दोनों घर के भीतर पहुँचे तो दोनों की मुलाकात हुयी। Vikram Aur Betal Ki Kahaniya is a Hindi album released on Aug 1988. फिर भी राजा ने सोचा जरूर कोई कारण होगा और उसने उसकी बात मान ली।, उस दिन से वीरवर रोज हज़ार तोले सोना भण्डारी से लेकर अपने घर आता। उसमें से आधा ब्राह्मणों में बाँट देता, बाकी के दो हिस्से करके एक मेहमानों, वैरागियों और संन्यासियों को देता और दूसरे से भोजन बनवाकर पहले ग़रीबों को खिलाता, उसके बाद जो बचता, उसे स्त्री-बच्चों को खिलाता, आप खाता। काम यह था कि शाम होते ही ढाल-तलवार लेकर राजा के पलंग की चौकीदारी करता। राजा को जब कभी रात को ज़रूरत होती, वह हाज़िर रहता।, एक दिन आधी रात के समय राजा को मरघट की ओर से किसी के रोने की आवाज़ आयी। उसने वीरवर को पुकारा तो वह आ गया। राजा ने कहा, “जाओ, पता लगाकर आओ कि इतनी रात गये यह कौन रो रहा है ओर क्यों रो रहा है?”, वीरवर तत्काल वहाँ से चल दिया। मरघट में जाकर देखता क्या है कि सिर से पाँव तक एक स्त्री गहनों से लदी कभी नाचती है, कभी कूदती है और सिर पीट-पीटकर रोती है। लेकिन उसकी आँखों से एक बूँद आँसू नहीं निकलती। वीरवर ने पूछा, “तुम कौन हो? फिर धर्मदत्त बोला, “मदनसेना मैं तुमसे बहुत प्रेम करता हूँ, मैं पूर्णिमा के दिन तुम्हारी प्रतिक्षा करूंगा, तुम आओगी।”, “यदि ईश्वर ने चाहा तो जरूर आऊंगी” इतना कहकर मदनसेना चली गयी।, उधर मदनसेना को देखने उसके घर लड़के वाले आये हुए थे। मदनसेना के माता-पिता को लड़का बहुत पसंद था और उन सभी को मदनसेना।बात कुछ ऐसी थी कि लड़के की दादी का अंत समय निकट था और वो मरने से पहले अपने पोते का विवाह होते देखना चाहती थी इसलिए आनन-फानन में दो दिनों में ही विवाह संपन्न करने का फैसला लिया गया।, मदनसेना अपने माता-पिता की इच्छा को इंकार न कर सकी। उसका विवाह हो गया और वह जब अपने पति के पास गयी तो उदास होकर बोली, “आप मुझ पर विश्वास करें और मुझे अभय दान दें तो एक बात कहूँ।” पति ने विश्वास दिलाया तो उसने सारी बात कह सुनायी।, सुनकर पति ने उसे चरित्रहीन समझा और उसे मन ही मन त्यागकर उसने जाने की आज्ञा दे दी और उसके पीछे-पीछे चल पड़ा।, मदनसेना अच्छे-अच्छे कपड़े और गहने पहन कर चली। रास्ते में उसे एक चोर मिला। उसने उसका आँचल पकड़ लिया। मदनसेना ने कहा, “तुम मुझे छोड़ दो। मेरे गहने लेना चाहते हो तो लो।”, चोर बोला, “मैं तो तुम्हें चाहता हूँ।” मदनसेना ने उसे सारा हाल कहा, “पहले मैं वहां हो आऊँ, तब तुम्हारे पास आऊँगी।”, चोर ने उसे छोड़ दिया और वह भी उसके पीछे-पीछे चल पड़ा।, मदनसेना धर्मदत्त के पास पहुँची। उसे देखकर वह बड़ा खुश हुआ और उसने पूछा, “तुम अपने पति से बचकर कैसे आयी?”, मदनसेना ने सारी बात सच-सच कह दी। धर्मदत्त पर उसका बड़ा गहरा असर पड़ा। उसे मदनसेना के साथ समय बिताना अच्छा नहीं लग रहा था। उसने मदनसेना को समझाकर वापस उसे घर जाने को कहा। मदनसेना चल पड़ी।, फिर वह चोर के पास आयी। चोर सब कुछ जानकर ब़ड़ा प्रभावित हुआ और उसे अपने आप पर ग्लानि महसूस हुयी। उसने मदनसेना को बिना कुछ किये जाने दिया। इस प्रकार मदनसेना सबसे बचकर पति के पास आ गयी। पति ने भी सारा हाल देख लिया था वह बहुत प्रसन्न हुआ और उसके साथ आनन्द से रहने लगा।, इतना कहकर बेताल बोला, “बताओ विक्रम! All hindi kahaniya, hindi stories, shiv puran ki khananiya, funny hindi kahaniya, hindi me kahaniya - बेताल पच्चीसी - इक्कीसवीं कहानी! Adil Siddiqui. Old Serials Archive. Vikram was a gud judge.he always judge wid patience nd intelligency. Vikram Aur Betal Ki Kahaniya is an audio show, where Rajiv Malik digs out stories or interesting updates you've never heard before. Asha Patel. 5 yıl önce | 137 görüntülenme. Aj hum apko Vikram aur Betal ki agli kahani pesh karne ja rahe hai. Follow. Yasiro Vernualo2321. 22:58. Aj fir Vikram ne Betal ko pakda aur usko apne pith par bithakar le ja raha tha. The series is based on Indian mythology. Listen to Vikram Aur Betal Ki Kahaniya, a Hindi show on Gaana. $('.scrollImgdetails img').attr("src", $('._d_t_img img').attr("data-src")).css('opacity', 1); If everyone loves it our effort will be successful. Pichli kahani me apko pata chala hoga ke Vikram aur Betal kaise mile. तुमने मुझे हरा दिया। मैं तुम्हें जीवन-दान देता हूँ।”, इसके बाद देव ने एक कथा कहीं, “राजन्, एक नगर और एक नक्षत्र में तुम तीन आदमी पैदा हुए थे। तुमने राजा के घर में जन्म लिया, दूसरे ने तेली के और तीसरे ने कुम्हार के। तुम यहाँ का राज करते हो, तेली पाताल में राज करता था और साथ ही वह महान साधक भी था। आपसी शत्रुता तथा लोभ के कारण कुम्हार ने योग साधकर तेली को मारकर श्मशान में पिशाच बना पीपल के पेड़ से लटका दिया है। अब वह तुम्हें मारने की फिराक में है। उससे सावधान रहना।”, इतना कहकर देव चला गया और राजा महल में आ गया। राजा को वापस आया देख सबको बड़ी खुशी हुई। नगर में आनन्द मनाया गया। विक्रम फिर राज करने लगा।, एक दिन की बात है कि शान्तिशील नाम का एक योगी विक्रम के पास दरबार में आया और उसे एक फल देकर चला गया। विक्रम को आशंका हुई कि देव ने जिस आदमी को बताया था, कहीं यह वही तो नहीं है! vikram betal ki kahani. बैताल पचीसी इक्कीसवीं कहानी: सबसे ज्यादा प्रेम में अंधा कौन था?, विक्रम -बेताल की कहानियाँ, बैताल पच्चीसी की कहानियाँ, Baital Pachisi Twenty-first Story: Sabse Jyada Prem Me Andha Kaun Tha?, Vikram … नहीं बताओगे तो तुम्हारी खोपड़ी फट जाएगी ये मेरा श्राप हैं”, विक्रम बोला, “जो कपड़ा बनाकर बेचता है, वह शूद्र है। जो पशुओं की भाषा तथा शरीर के अंगों की जानकारी रखता है, वह वैश्य है। जो शास्त्र पढ़ा है, ब्राह्मण है; पर जो शब्दवेधी तीर चलाना जानता है, वह राजकुमारी का सजातीय है और उसके योग्य है। राजकुमारी उसी को मिलनी चाहिए।”, राजा के इतना कहते ही बेताल भयानक अट्टहास करते हुए गायब हो गया। 12 years ago | 3.8K views. Pichli kahani me apko pata chala hoga ke Vikram aur Betal kaise mile. Presenting "Vikram Betal Stories" in Hindi. Download vikram betal ki kahaniya apk 5.3.1 for Android. Vikram Aur Betaal Episode 24. चोर ने राजा के पोटली के तरफ देख कर कहा, “अच्छा, तब तो तुम मेरे साथी हो। सुबह होने को है आओ, मेरे घर चलो।”, दोनो घर पहुँचे। उसे बिठलाकर चोर किसी काम के लिए चला गया। इसी बीच उसकी दासी वहां आयी और बोली, “तुम यहाँ क्यों आये हो? Aj fir Vikram ne Betal ko pakda aur usko apne pith par bithakar le ja raha tha. … Yasiro Vernualo2321. Vikram Aur Betal Ki Kahaniya Album has 1 song sung by Rajiv Malik, Abhay Bhargav, Romendra Sagar. Vikram Aur Betaal Ki Kahaniya | Kids Animated Hindi Series 2. विक्रम फिर उसके पीछे-पीछे पीपल के पेड़ की तरफ चल पड़े।, गांधार देश में ब्रह्मदत्त नाम का राजा राज करता। उसके राज्य में एक वैश्य था, जिसका नाम हिरण्यदत्त था। उसके मदनसेना नाम की एक कन्या थी।, एक दिन मदनसेना अपनी सखियों के साथ बाग़ में गयी। वहाँ संयोग से सोमदत्त नामक सेठ का लड़का धर्मदत्त अपने मित्र के साथ आया हुआ था। वह मदनसेना को देखते ही उसपर ऐसा मोहित हुआ की उससे प्रेम करने लगा। घर लौटकर वह सारी रात उसके लिए बैचेन रहा। अगले दिन वह फिर बाग़ में गया।, मदनसेना वहाँ अकेली बैठी थी। उसके पास जाकर धर्मदत्त ने अपने प्रेम का प्रस्ताव रखा परन्तु मदनसेना ने इंकार कर दिया। बहुत कहने पर भी जब मदनसेना न मानी तब उसने कहा, “तुम मुझसे प्यार नहीं करोगी तो मैं प्राण दे दूँगा।” और पास ही बह रही एक नदी में कूद गया।, कुछ देर तक तो मदनसेना सोचती रही कि जब डूबने लगेगा तो खुद तैरकर बाहर निकल आयेगा लेकिन जब युवक डूबने के पश्चात भी तैरकर बाहर नहीं आया तब मदनसेना नदी में कूद पड़ी और उस युवक को बचा लायीं।, “तुम कितने मूर्ख हो, यदि नदी में डूब जाते तो…तुम तैरकर बाहर क्यों नहीं आये।” Adil Siddiqui. बताओ कि साँप, बाज, और ब्राह्मणी, इन तीनों में अपराधी कौन है?”, राजा ने कहा, “कोई नहीं। साँप तो इसलिए नहीं क्योंकि वह शत्रु के वश में था। बाज इसलिए नहीं कि वह भूखा था। जो उसे मिल गया, उसी को वह खाने लगा। ब्राह्मणी इसलिए नहीं कि उसने अपना धर्म समझकर उसे खीर दी थी और अच्छी खीर दी थी। जो इन तीनों में से किसी को दोषी कहेगा, वह स्वयं दोषी होगा।, इसलिए अपराधी ब्राह्मणी का पति था जिसने बिना विचारे ब्राह्मणी को घर से निकाल दिया।” इतना सुनकर बेताल फिर पेड़ पर जा लटका और राजा को वहाँ जाकर उसे लाना पड़ा।राह में बेताल ने चलते-चलते नयी कहानी सुनायी।, बहुत समय पहले की बात है, अयोध्या नगरी में वीरकेतु नाम का राजा राज करता था। उसके राज्य में रत्नदत्त नाम का एक साहूकार था, जिसकी रत्नावती नाम की एक लड़की थी। वह बहुत ही सुन्दर थी लेकिन वह लड़के के वेश में रहा करती थी और किसी से भी ब्याह नहीं करना चाहती थी। बहुत सारे राजा-महाराजा उससे विवाह करने के लिए आये लेकिन रत्नावती ने सबको इंकार कर दिया जिसके कारण उसके पिता बड़ा दु:खी थे।, इसी बीच नगर में खूब चोरियाँ होने लगी। प्रजा दु:खी हो गयी। कोशिश करने पर भी जब चोर पकड़ में न आया तो राजा स्वयं उसे पकड़ने के लिए निकले।, रत्नावती को एक अजीब तरह की आदत थी, उसे फल चुरा के खाने में आनंद आता था। इसी तरह एक रात जब वह एक पेड़ से फल तोड़ने की कोशिश कर रही थी कि उसी समय चोर वहां से गुजरा। जब उसने रत्नावती को फल चोरी करते देखा तो उसकी मदद की और उसे फल तोड़ना सिखाया। Top 10 Moral stories in hindi. बताओ, अब तुम्हारा न्याय क्या कहता है। पति, धर्मदत्त और चोर, इनमें से कौन अधिक त्यागी है?”, विक्रम ने कहा, “जो त्याग बिना स्वार्थ के किया जाता है वही सच्चा त्याग कहलाता हैं। चोर का त्याग ही सबसे बड़ा त्याग हैं। मदनसेना का पति तो उसे दूसरे आदमी पर रुझान होने से त्याग देता है। धर्मदत्त उसे इसलिए छोड़ता है कि उसका मन बदल गया था, फिर उसे यह डर भी रहा होगा कि कहीं उसका पति उसे राजा से कहकर दण्ड न दिलवा दे। लेकिन चोर का किसी को पता न था, फिर भी उसने उसे छोड़ दिया, न तो गहने ही लिए। इसलिए वह उन दोनों से अधिक त्यागी था।”, राजा का यह जवाब सुनकर बेताल बोला- “तुम सच में बड़े न्यायी हो, तुम्हारा न्याय विश्व में अमर होगा। और फिर पेड़ पर जा लटका। राजा विक्रमादित्य फिर उसके पीछे तेज कदमों से चल पड़े।, विक्रम एक बार फिर बेताल को पेड़ से उतारकर योगी के पास चल पड़े। Download Vikram Betal Kahaniya in Hindi apk 1.0 for Android. Raste me […] Takip et. These are spellbinding stories told to the wise King Vikramaditya by the wily ghost Betaal. The series has aired on &TV and digitally on ZEE5 platform, starring Aham Sharma and Aayam Mehta in lead roles. Vikram Betal ki Manoranjak Kahaniya : विक्रम बेताल की मनोरंजक कहानियां 2017 Tenaliram Ki Sujh Bujh : तेनालीराम की सूझबूझ यह बताओ कि स्वामी की इतनी खुशी के समय उसे ऐसा क्या दुख हुआ कि मंत्री का हृदय फट गया, और वह मर गया?”, विक्रम ने कहा, “सुन बेताल, मंत्री का ह्रदय इसलिये फटा कि उसने सोचा राजा फिर स्त्री के चक्कर में पड़ गया और उसके भोग-विलास के कारण फिर राज्य की दुर्दशा होगी। अच्छा होता ये बात मैं राजा को न बताता।”, विक्रम का इतना कहना था कि बेताल बोला राजन् तुम्हें पहली शर्त याद है न लो अब मैं चला और बेताल फिर पेड़ पर जा लटका। राजा विक्रम तेजी से उसके पीछे चल पड़े।, राजा फिर उस पेड़ के पास पहुँचा और जैसे ही मुर्दे को लेकर चला बेताल ने राजा को अपनी शर्त याद दिलाया कि अगर तू रास्ते में बोलेगा तो मैं वापस पेड़ पर लौट जाऊँगा। और इतना कहकर बैताल ने एक कहानी कही।, बनारस में देवस्वामी नाम का एक ब्राह्मण रहता था। उसके हरिदास नाम का पुत्र था। हरिदास की बड़ी सुन्दर पत्नी थी। नाम था लावण्यवती। एक दिन वे महल के ऊपर छत पर सो रहे थे कि आधी रात के समय एक गंधर्व-कुमार आकाश में घूमता हुआ उधर से निकला।, वह लावण्यवती के रूप पर मुग्ध होकर उसे उड़ाकर ले गया। जागने पर हरिदास ने देखा कि उसकी स्त्री नही है तो उसे बड़ा दुख हुआ और वह मरने को तैयार हो गया। लोगों के समझाने पर वह मान तो गया; लेकिन यह सोचकर कि तीरथ करने से शायद पाप दूर हो जाय और स्त्री मिल जाय, वह घर से निकल पड़ा।, चलते-चलते वह किसी गाँव में एक ब्राह्मण के घर पहुँचा। उसे भूखा देख ब्राह्मणी ने उसे कटोरा भरकर खीर दे दी और तालाब के किनारे बैठकर खाने को कहा। जिससे हाथ-मुँह धोने को पानी भी मिल जाये और प्यास लगने पर प्यास भी बुझाया जा सके। हरिदास खीर लेकर एक पेड़ के नीचे आया और कटोरा वहाँ रखकर तालाब मे हाथ-मुँह धोने गया।, इसी बीच एक बाज किसी साँप को लेकर उसी पेड़ पर आ बैठा और जब वह उसे खाने लगा तो साँप के मुँह से ज़हर टपककर कटोरे में गिर गया। हरिदास को कुछ पता नहीं था।, वह उस खीर को खा गया। ज़हर का असर होने पर वह तड़पने लगा और दौड़ा-दौड़ा ब्राह्मणी के पास आकर बोला, “तूने मुझे जहर दे दिया है।” इतना कहने के बाद हरिदास मर गया।, पति ने यह देखा तो ब्राह्मणी को ब्रह्मघातिनी कहकर घर से निकाल दिया। इतना कहकर बेताल बोला, “राजन्! Tune in to all episodes of Vikram Aur Betal Ki Kahaniya. गुरु ने कहा, “सेवक का धर्म है कि स्वामी के लिए जान दे दे।”, राजा की चिता तैयार हुई। सेनापति वहाँ गया और उसमें कूद पड़ा। जब उन्मादिनी को यह बात मालूम हुई तो वह पति के साथ जल जाना धर्म समझकर चिता के पास पहुँची और उसमें जाकर भस्म हो गयी।, इतना कहकर बेताल ने पूछा, “राजन्, बताओ, सेनापति और राजा में कौन अधिक साहसी था?”, राजा ने कहा, “राजा अधिक साहसी था; क्योंकि उसने राजधर्म पर दृढ़ रहने के लिए उन्मादिनी को उसके पति के कहने पर भी स्वीकार नहीं किया और अपने प्राणों को त्याग दिया। सेनापति कुलीन सेवक था। अपने स्वामी की भलाई में उसका प्राण देना अचरज की बात नहीं। असली काम तो राजा ने किया कि प्राण छोड़कर भी राजधर्म नहीं छोड़ा।”, राजा विक्रम का यह उत्तर सुनकर बेताल फिर पेड़ पर जा लटका। राजा उसे पुन: पकड़ लाये और तब उसने रास्ते में फिर एक कहानी सुनायी।, उज्जैन नगरी में महासेन नाम का राजा राज करता था। उसके राज्य में वासुदेव शर्मा नाम का एक ब्राह्मण रहता था, जिसके गुणाकर नाम का बेटा था। गुणाकर बड़ा जुआरी था। वह अपने पिता का सारा धन जुए में हार गया। ब्राह्मण ने उसे घर से निकाल दिया।, वह दूसरे नगर में पहुँचा। वहां उसे एक योगी मिला। उसे हैरान देखकर उसने कारण पूछा तो उसने सब बता दिया। योगी ने कहा, “लो, पहले कुछ खा लो।” गुणाकर ने जवाब दिया, “मैं ब्राह्मण का बेटा हूँ। आपकी भिक्षा कैसे खा सकता हूँ?”, इतना सुनकर योगी ने सिद्धि को याद किया। वह आयी। योगी ने उससे आवभगत करने को कहा। सिद्धि ने एक सोने का महल बनवाया और गुणाकर उसमें रात को अच्छी तरह से रहा। सबेरे उठते ही उसने देखा कि महल आदि कुछ भी नहीं है। उसने योगी से कहा, “महाराज, उस स्त्री के बिना अब मैं नहीं रह सकता।”, योगी ने कहा, “वह तुम्हें एक विद्या प्राप्त करने से मिलेगी और वह विद्या जल के अन्दर खड़े होकर मंत्र जपने से मिलेगी। लेकिन जब वह लड़की तुम्हें मेरी सिद्धि से मिल सकती है तो तुम विद्या प्राप्त करके क्या करोगे?”, गुणाकर ने कहा, “नहीं, मैं स्वयं वैसा करूँगा।” योगी बोला, “कहीं ऐसा न हो कि तुम विद्या प्राप्त न कर पाओ और मेरी सिद्धि भी नष्ट हो जाय !”, पर गुणाकर न माना। योगी ने उसे नदी के किनारे ले जाकर मंत्र बता दिये और कहा कि जब तुम जप करते हुए माया से मोहित होगे तो मैं तुम पर अपनी विद्या का प्रयोग करूँगा। उस समय तुम अग्नि में प्रवेश कर जाना।”, गुणाकर जप करने लगा। जब वह माया से एकदम मोहित हो गया तो देखता क्या है कि वह किसी ब्राह्मण के बेटे के रूप में पैदा हुआ है। उसका ब्याह हो गया, उसके बाल-बच्चे भी हो गये। वह अपने जन्म की बात भूल गया। तभी योगी ने अपनी विद्या का प्रयोग किया। गुणाकर मायारहित होकर अग्नि में प्रवेश करने को तैयार हुआ। उसी समय उसने देखा कि उसे मरता देख उसके माँ-बाप और दूसरे लोग रो रहे हैं और उसे आग में जाने से रोक रहे हैं। गुणाकार ने सोचा कि मेरे मरने पर ये सब भी मर जायेंगे और पता नहीं कि योगी की बात सच हो या न हो।, इस तरह सोचता हुआ वह आग में घुसा तो आग ठंडी हो गयी और माया भी शान्त हो गयी। गुणाकर चकित होकर योगी के पास आया और उसे सारा हाल बता दिया।, योगी ने कहा, “मालूम होता है कि तुम्हारे करने में कोई कसर रह गयी।” योगी ने स्वयं सिद्धि की याद की, पर वह नहीं आयी। इस तरह योगी और गुणाकर दोनों की विद्या नष्ट हो गयी।, इतनी कथा कहकर बेताल ने पूछा, “राजन्, यह बताओ कि दोनों की विद्या क्यों नष्ट हो गयी?”, राजा बोला, “इसका जवाब साफ़ है। निर्मल और शुद्ध संकल्प करने से ही सिद्धि प्राप्त होती है। गुणाकर के दिल में शंका हुई कि पता नहीं, योगी की बात सच होगी या नहीं। योगी की विद्या इसलिए नष्ट हुई कि उसने अपात्र को विद्या दी।”, राजा का उत्तर सुनकर बेताल फिर पेड़ पर जा लटका। राजा वहाँ गया और उसे लेकर चला तो उसने फिर दूसरी कहानी सुनायी।, वक्रोलक नामक नगर में सूर्यप्रभ नाम का राजा राज करता था। उसके कोई सन्तान न थी। उसी समय में एक दूसरी नगरी में धनपाल नाम का एक साहूकार रहता था। उसकी स्त्री का नाम हिरण्यवती था और उसके धनवती नाम की एक पुत्री थी। जब धनवती बड़ी हुई तो धनपाल मर गया और उसके नाते-रिश्तेदारों ने उसका धन ले लिया।, हिरण्यवती अपनी लड़की को लेकर रात के समय नगर छोड़कर चल दी। रास्ते में उसे एक चोर सूली पर लटकता हुआ मिला। वह मरा नहीं था। उसने हिरण्यवती को देखकर अपना परिचय दिया और कहा, “मैं तुम्हें एक हज़ार अशर्फियाँ दूँगा। तुम अपनी लड़की का ब्याह मेरे साथ कर दो।”, चोर बोला, “मेरा कोई पुत्र नहीं है और निपूते की परलोक में सदगति नहीं होती। अगर मेरी आज्ञा से और किसी से भी इसके पुत्र पैदा हो जायेगा तो मुझे सदगति मिल जायेगी।”, हिरण्यवती ने लोभ के वश होकर उसकी बात मान ली और धनवती का ब्याह उसके साथ कर दिया। चोर बोला, “इस बड़ के पेड़ के नीचे अशर्फियाँ गड़ी हैं, सो ले लेना और मेरे प्राण निकलने पर मेरा क्रिया-कर्म करके तुम अपनी बेटी के साथ अपने नगर में चली जाना।”, इतना कहकर चोर मर गया। Spread the loveVikram aur Betal – Chor ki kahaani. Report. The show aired on every Sunday, at 11 AM. Kahaniya Vikram Aur Betaal Ki - 7th June 2009 - Pt1. ब्राह्मण, उसका लड़का और ब्राह्मणी बड़े सोच में पड़े। दैवयोग से हुआ क्या कि लड़की को साँप ने काट लिया और वह मर गयी। उसके बाप, भाई और तीनों लड़कों ने बड़ी भाग-दौड़ की, ज़हर झाड़नेवालों को बुलाया, पर कोई नतीजा न निकला। सब अपनी-अपनी करके चले गये।, दु:खी होकर वे उस लड़की को श्मशान में ले गये और क्रिया-कर्म कर आये। तीनों लड़कों में से एक ने तो उसकी हड्डियाँ चुन लीं और फकीर बनकर जंगल में चला गया। दूसरे ने राख की गठरी बाँधी और वहीं झोपड़ी डालकर रहने लगा। तीसरा योगी होकर देश-देश घुमने लगा।, एक दिन की बात है, वह तीसरा लड़का घूमते-घामते किसी नगर में पहुँचा और एक ब्राह्मण के घर भोजन करने बैठा। उस ब्राह्मण का बेटा राजा के यहां सैनिक था। भोजन के दौरान ही कुछ सैनिक ब्राह्मण के बेटे की शव लेकर आये और वो सभी घटना ब्राह्मण को बता दी जिसके कारण उसका बेटा मरा था।, ब्राह्मणी रोने लगी, वह योगी भी भोजन छोड़ उठ खड़ा हुआ। ब्राह्मणी का विलाप उसके पति से नही देखा गया। ब्राह्मण के पास उसके पूर्वजों की दी हुयी संजीवनी विद्या की पोथी थी। ब्राह्मण ने संजीवनी विद्या की पोथी लाकर जैसे ही एक मन्त्र पढ़ा। उसका मरा हुआ लड़का फिर से जीवित हो गया।, यह देखकर वह योगी सोचने लगा कि अगर यह पोथी मेरे हाथ पड़ जाये तो मैं भी उस लड़की को फिर से जिला सकता हूँ। इसके बाद उसने भोजन किया और वहीं ठहर गया। जब रात को सब खा-पीकर सो गये तो वह योगी चुपचाप वह पोथी लेकर चल दिया। जिस स्थान पर उस लड़की को जलाया गया था, वहां जाकर उसने देखा कि दूसरे लड़के वहां बैठे बातें कर रहे हैं।, इस लड़के के यह कहने पर कि उसे संजीवनी विद्या की पोथी मिल गयी है और वह मन्त्र पढ़कर लड़की को जिला सकता है, उन दोनों ने हड्डियाँ और राख निकाली। ब्राह्मण ने जैसे ही मंत्र पढ़ा, वह लड़की जी उठी। अब तीनों उसके पीछे आपस में झगड़ने लगे।, इतना कहकर बेताल बोला, “राजन्, बताओ कि वह लड़की किसकी स्त्री होनी चाहिए?”, राजा ने जवाब दिया, “जो वहां कुटिया बनाकर रहा, उसकी।” बेताल ने पूछा, “क्यों?”, विक्रम बोला, “जिसने हड्डियाँ रखीं, वह तो उसके बेटे के बराबर हुआ। जिसने विद्या सीखकर जीवन-दान दिया, वह बाप के बराबर हुआ। जो राख लेकर रमा रहा, वही उसकी हक़दार है।”, विक्रम का यह जवाब सुनकर बेताल ने कहा- “तुमने बहुत अच्छा गणित किया परन्तु अपनी शर्त भूल गये और फिर बेताल पीपल के पेड़ पर जा लटका। विक्रम को फिर लौटना पड़ा और जब वह उसे लेकर चला तो बेताल ने फिर एक कहानी सुनायी।, वर्धमान नाम के एक नगर में रूपसेन नाम का एक दयालु और न्यायप्रिय राजा राज करता था। एक दिन उसके यहाँ वीरवर नाम का एक राजपूत नौकरी के लिए आया। राजा ने उससे पूछा कि उसे ख़र्च के लिए क्या चाहिए तो उसने जवाब दिया, हज़ार तोले सोना।, सुनकर सबको बड़ा आश्चर्य हुआ। राजा ने पूछा, “तुम्हारे साथ कौन-कौन है?” उसने जवाब दिया, “मेरी स्त्री, बेटा और बेटी।” राजा को और भी अचम्भा हुआ। आख़िर चार जने इतने धन का क्या करेंगे? Raste me […] Spread the loveVikram aur Betal – Aamle kaa kaarj. Playing next . June 12, 2020 July 24, 2020 Pankaj Kumar 2 Comments stories of vikram betal, vikram aur betaal cast, vikram betal first story, vikram betal ki kahaniyan, vikram betal last story, Vikram Betal Story in Hindi June 12, 2020 July 24, 2020 Pankaj Kumar 2 Comments stories of vikram betal, vikram aur betaal cast, vikram betal first story, vikram betal ki kahaniyan, vikram betal last story, Vikram Betal Story in Hindi Mostly this is a total collection of Hindi stories book and Hindi Kahaniya. Aj hum apko Vikram aur Betal ki agli kahani pesh karne ja rahe hai. Hindi Articles on Computer Aptitude and Quotes In Hindi, आपने राजा विक्रम और बेताल का नाम जरूर सुना होगा। बेताल द्वारा राजा विक्रम को कही गयी कहानियों को बच्चों के साथ बड़े-बूढ़े भी बड़े चाव से सुनते हैं।यदि आपने नही सुना तो संक्षेप में जान लीजिए।, राजा विक्रम उज्जैन देश के राजा थे। वे एक योगी के कहने पर बेताल को मसान में स्थित पीपल के पेड़ से उतारकर योगी के पास लाने के लिए जाते है लेकिन बेताल भी कम चालाक नहीं था। वो बार-बार राजा के बंधन से छूट वापस पेड़ पर जा लटकता था।, जब राजा विक्रम, बेताल को लेकर चलते तो बेताल एक ही शर्त पर चलने को तैयार होता। उसका शर्त था की राजा विक्रम रास्ते में कुछ भी नहीं बोलेगा। यदि बोला तो मैं उसी समय फिर से पेड़ पर जा लटकुँगा।, विक्रम को यह शर्त स्वीकार करना ही पड़ता क्योंकि बेताल के योग-बल के सामने उनकी शक्ति कमजोर पड़ जाती थी।. $('._de_tp .blurimg img').attr("src", $('._de_tp .blurimg img').attr("data-src")).css('opacity', 1); }, 4000); Raste me […] Browse more videos. Tarun Khanna (L) and Badrul Islam in a still from the TV show 'Kahaniyan Vikram Aur Betaal Ki'. 5 years ago | 1K views. Follow. “Kahaniya Vikram aur Betaal ki” is a TV series telecasted on DD Network, Colors channel. ! Listen to Vikram Aur Betal Ki Kahaniya song in high quality & download Vikram Aur Betal Ki Kahaniya song on Gaana.com Takip et. Vikram Betal was a television programme that aired on DD National. Spread the loveVikram aur Betal – Padmavati ki paheli. Tune in to all episodes of Vikram Aur Betal Ki Kahaniya. With Aham Sharma, Makrand Deshpande, Amir Malik, Sooraj Thapar. दूसरी ओर यह मुश्किल कि न दे तो दीवान का लड़का मर जायें।, बहुत सोच-विचार करने के बाद राजा ने दोनों का विवाह कर दिया। बनावटी कन्या ने यह शर्त रखी कि चूँकि वह दूसरे के लिए लायी गयी थी, इसलिए उसका यह पति छ: महीने तक तीर्थ-यात्रा करेगा, तब वह उससे बात करेगी। दीवान के लड़के ने यह शर्त मान ली।, विवाह के बाद वह उसे मृगांकदत्ता के पास छोड़ तीर्थ-यात्रा पर चला गया। उसके जाने के कुछ दिनों के बाद ही उस कन्या-रूपधारी ब्राह्मण का भेद मृगांकदत्ता के सामने खुल गया जिसके बाद दोनों आनन्द से रहने लगे। अब ब्राह्मण कुमार रात में आदमी बन जाता और दिन में कन्या बना रहता।, जब छ: महीने बीतने को आये तो वह एक दिन मृगांकदत्ता को लेकर भाग गया।, उधर सिद्ध-गुरु एक दिन अपने मित्र दिनकर को युवा पुत्र बनाकर राजा के पास लाया और उस कन्या को माँगा। शाप के डर के मारे राजा ने कहा, “वह कन्या तो जाने कहाँ चली गयी। आप मेरी कन्या से इसका विवाह कर दें।”, वह राजी हो गया और राजकुमारी का विवाह दिनकर के साथ कर दिया। घर आने पर उसी रूपधारी ब्राह्मण कुमार ने कहा, “यह राजकुमारी मेरी स्त्री है। मैंने इससे गंधर्व-रीति से विवाह किया है।”, दिनकर ने कहा, “यह मेरी स्त्री है, क्योंकि मैंने सबके सामने विधि-पूर्वक ब्याह किया है।”, इतना कहकर बेताल ने पूछा, ” राजन् यह बताओ शशिप्रभा दोनों में से किसकी पत्नी होनी चाहिये?”, राजा ने कहा, “मेरी राय में वह दिनकर की पत्नी है, क्योंकि राजा ने सबके सामने विधि-पूर्वक विवाह किया था। ब्राह्मण कुमार ने तो चोरी से ब्याह किया था। चोरी की चीज़ पर चोर का अधिकार नहीं होता, साथ ही उसने अपने विलासिता के कारण शशिप्रभा और मृगांकदत्ता दोनों को धोखा दिया”, इतना सुनना था कि बेताल गायब हो गया और राजा को जाकर फिर उसे लाना पड़ा। रास्ते में बेताल ने फिर एक कहानी सुनायी।, हिमाचल पर्वत पर गंधर्वों का एक नगर था, जिसमें जीमूतकेतु नामक राजा राज करता था। उसका एक लड़का था, जिसका नाम जीमूतवाहन था। बाप-बेटे दोनों भले थे। धर्म-कर्म में लगे रहते थे। इससे प्रजा बहुत स्वच्छन्द हो गयी और एक दिन उन्होंने राजा के महल को घेर लिया। राजकुमार ने यह देखा तो पिता से कहा कि आप चिन्ता न करें। मैं सबको मार भगाऊँगा। राजा बोला, “नहीं, ऐसा मत करो। युधिष्ठिर भी महाभारत करके पछताये थे।”, इसके बाद राजा अपने गोत्र के लोगों को राज्य सौंप राजकुमार के साथ मलयांचल पर्वत पर जाकर मढ़ी बनाकर रहने लगा। वहां जीमूतवाहन की एक ॠषि के बेटे से मित्रता हो गयी। एक दिन दोनों पर्वत पर भवानी के मन्दिर में गये तो दैवयोग से उन्हें मलयकेतु नामक राजा की पुत्री मिली। दोनों एक-दूसरे पर मोहित हो गये। जब कन्या के पिता को मालूम हुआ तो उसने अपनी बेटी उसे ब्याह दी।, एक दिन की बात है कि जीमूतवाहन को पहाड़ पर एक सफ़ेद ढेर दिखाई दिया। पूछा तो मालूम हुआ कि पाताल से बहुत-से नाग आते हैं, जिन्हें गरुड़ खा लेता है। यह ढेर उन्हीं की हड्डियों का है। उसे देखकर जीमूतवाहन आगे बढ़ गया।, कुछ दूर जाने पर उसे किसी के रोने की आवाज़ सुनाई दी। पास गया तो देखा कि एक बुढ़िया रो रही है। कारण पूछा तो उसने बताया कि आज उसके बेटे शंखचूड़ नाग की बारी है। उसे गरुड़ आकर खा जायेगा। जीमूतवाहन ने कहा, “माँ, तुम चिन्ता न करो, मैं उसकी जगह चला जाऊँगा।” बुढ़िया ने बहुत समझाया, पर वह न माना।, इसके बाद गरुड़ आया और उसे चोंच में पकड़कर उड़ा ले गया। संयोग से राजकुमार का बाजूबंद गिर पड़ा, जिस पर राजा का नाम खुदा था। उस पर खून लगा था। राजकुमारी ने उसे देखा तो वह मूर्च्छित हो गयी। होश आने पर उसने राजा और रानी को सब हाल सुनाया। वे बड़े दु:खी हुए और जीमूतवाहन को खोजने निकले। तभी उन्हें शंखचूड़ मिला। उसने गरुड़ को पुकार कर कहा, “हे गरुड़! 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